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आज सोमवार है, इसलिए मैं आपके समक्ष अपनी साप्ताहिक पाती के माध्यम से उपस्थित हूँ।
यह पाती आज मैं आपको गुजरात के कच्छ से लिख रहा हूँ। यहाँ आने का उद्देश्य गोडावण के संरक्षण कार्यों की समीक्षा करने के साथ-साथ मैंग्रोव के संरक्षण और उनके बड़े पैमाने पर रोपण को बढ़ावा देना है। गोडावण, जिसे हम ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भी कहते हैं, हमारे देश की समृद्ध जैव-विविधता और प्राकृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को और गति देना हमारी प्राथमिकता है।
गोडावण का राजस्थान से भी विशेष और भावनात्मक संबंध है। राजस्थान के अर्ध-शुष्क घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र इस पक्षी का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास रहे हैं। इसलिए कच्छ में गोडावण संरक्षण के प्रयासों की समीक्षा करते हुए राजस्थान की इन महत्वपूर्ण घासभूमियों और वहां की जैव-विविधता की भी स्वाभाविक रूप से याद आती है।
मेरी इस यात्रा का उद्देश्य इसी व्यापक सोच को आगे बढ़ाना है, प्रकृति के अलग-अलग पारिस्थितिकी तंत्रों को समझना, उनके संरक्षण के प्रयासों की समीक्षा करना और उन्हें जनभागीदारी के साथ और मजबूत करना।
विगत सप्ताह का ज्यादातर भाग आपके बीच अलवर में बीता। यह सप्ताह अलवर के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा, विशेषकर किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सहकारिता की भूमिका को लेकर।
हमारे गांवों की अर्थव्यवस्था में सहकारी संस्थाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। किसान को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने से लेकर कृषि, पशुपालन, डेयरी और ग्रामीण उद्यमों को आगे बढ़ाने तक, सहकारिता गाँव की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है। इसलिए सहकारी संस्थाओं के चुनाव केवल पदों का चुनाव नहीं होते, बल्कि यह तय करने का अवसर भी होते हैं कि हमारी सहकारिता व्यवस्था आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
हाल ही में संपन्न हुए सहकारिता चुनावों में अलवर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष के रूप में संजय नरुका जी और उपाध्यक्ष के रूप में इन्द्र यादव जी का चयन हुआ है। दोनों को हृदय से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
मुझे विश्वास है कि नई जिम्मेदारी के साथ दोनों भाई अलवर की सहकारी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में काम करेंगे। हमारा उद्देश्य ऐसी सहकारिता व्यवस्था का निर्माण करना है जो केवल वित्तीय सेवाओं तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने में सक्रिय भूमिका निभाए।
मेरा मानना है कि सहकारिता का अर्थ है मजबूत किसान, मजबूत गाँव और मजबूत अलवर।
हम चाहते हैं कि सहकारिता की पहुंच गाँव के अंतिम व्यक्ति तक हो। किसान को समय पर और सरल तरीके से वित्तीय सहायता मिले, छोटे किसानों और पशुपालकों को अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए मजबूत संस्थागत सहारा मिले और सहकारी संस्थाएँ आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ें।
बदलते समय के साथ हमारे किसान भी नई तकनीक अपना रहे हैं, युवा कृषि के साथ नए उद्यमों की ओर बढ़ रहे हैं और महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों तथा विभिन्न सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में हमारी सहकारिता व्यवस्था को भी परंपरा की मजबूती और आधुनिकता की गति, दोनों को साथ लेकर चलना होगा।
हमारा प्रयास होना चाहिए कि सहकारी बैंक और संस्थाएँ केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने वाली व्यवस्था न रहें, बल्कि अलवर के किसानों और ग्रामीण परिवारों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनें।
इसके लिए सहकारिता में तकनीक का अधिक उपयोग, प्रक्रियाओं में सरलता, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। बैंकिंग सेवाओं को गांवों तक और अधिक सुगम बनाना, युवाओं को सहकारिता से जोड़ना, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और कृषि के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी तथा ग्रामीण उद्यमिता को वित्तीय सहयोग देना हमारी प्राथमिकताओं का हिस्सा होना चाहिए।
मेरा मानना है कि जब किसान की मेहनत को बाजार, वित्त और तकनीक का साथ मिलता है, तभी गाँव की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। और जब गाँव मजबूत होता है, तभी अलवर की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत बनती है।
इसी सोच के साथ हम अलवर में ऐसी सहकारिता व्यवस्था का निर्माण देखना चाहते हैं जो किसान-केंद्रित, पारदर्शी, आधुनिक और आत्मनिर्भर हो। ऐसी व्यवस्था, जिसमें सहकारिता का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
आज अलवर के निकाय चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को मिली बड़ी सफलता ने हम सभी को उत्साहित किया है। अलवर के साथ-साथ पूरे राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन निश्चित रूप से सराहनीय रहा है।
ये परिणाम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार की नीतियों और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व पर जनता के विश्वास की जीत हैं। यह उस विश्वास की भी अभिव्यक्ति है कि विकास, सुशासन और जनकल्याण की राजनीति ही राजस्थान को आगे ले जाने का मार्ग है।
अलवर की जनता ने जिस विश्वास और स्नेह के साथ भारतीय जनता पार्टी को अपना आशीर्वाद दिया है, वह मेरे लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। इन परिणामों से अलवर के विकास के लिए निरंतर और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने के मेरे संकल्प को और बल मिला है।
अलवर लोकसभा क्षेत्र के हर हिस्से का संतुलित और समग्र विकास मेरी प्राथमिकता है। विकास का जो प्रवाह अलवर में प्रारंभ हुआ है, उसे कठूमर और थानागाजी सहित लोकसभा क्षेत्र के हर गाँव और हर क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए मैं पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करता रहूंगा।
यह जनादेश हमारे लिए केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि और अधिक जिम्मेदारी से काम करने का संकल्प है। जनता का विश्वास हमारी ताकत है और अलवर का विकास मेरा संकल्प।
यह सप्ताह अलवर के लिए विशेष और महत्वपूर्ण है, क्योंकि 17 सितंबर से 19 सितंबर तक हम सभी बाबा भर्तृहरि महाराज के पावन मेले में सम्मिलित होंगे।
हर वर्ष दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ आकर बाबा भर्तृहरि महाराज के दर्शन करते हैं। यह मेला केवल धार्मिक आस्था का अवसर नहीं, बल्कि अलवर की लोक-संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता का भी उत्सव है। मेरी सभी श्रद्धालुओं से अपील है कि बाबा भर्तृहरि महाराज के दर्शन के साथ-साथ मेले की गरिमा और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखें। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से हमारा प्रयास होना चाहिए कि देशभर से आने वाले श्रद्धालु अलवर की आस्था के साथ-साथ यहाँ की अतिथि-सत्कार और सेवा की परंपरा की भी सुखद स्मृति लेकर लौटें।
बाबा भर्तृहरि महाराज की जय!
आपका अपना
भूपेंद्र यादव