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अलवर के पास यूँ तो अनेक सौगातें हैं, लेकिन अपनी दहाड़ से सरिस्का को गुंजायमान करने वाले बाघ उसकी सबसे गौरवशाली पहचान हैं। प्रकृति में छोटे कीट से लेकर बड़े हाथी तक, सभी की अपनी विशिष्ट भूमिका है। यह भूमिका तुलनात्मक नहीं है। लेकिन सरिस्का के बाघों के प्रति अलवर ही नहीं, बल्कि पूरे देश का विशेष स्नेह है। इस स्नेह का स्रोत वह 18 वर्षों का अथक संघर्ष है, जिसने एक समय विलुप्त हो चुके बाघों को फिर से सरिस्का के जंगलों में बसाया और इस वन क्षेत्र को पुनः जीवन, संतुलन और समृद्धि प्रदान की।
कल, यानी 28 जून, को हमने एक साथ आकर अलवर में उस ऐतिहासिक दिवस का उत्सव मनाया, जब विलुप्त हो चुके बाघों की सरिस्का में वापसी का नया अध्याय शुरू हुआ। शून्य से 56 बाघों तक की यह यात्रा केवल वन्यजीव संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि अलवर के प्रकृति प्रेम, वनकर्मियों के समर्पण, वैज्ञानिक प्रयासों, स्थानीय समुदायों के सहयोग और सामूहिक संकल्प की अद्भुत गाथा है।
हम फिल्मों, फोटो और सरिस्का केंद्रित कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही हम एक फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन भी करेंगे जो सिर्फ बाघ नहीं बल्कि अलवर के समृद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की भव्यता को देश और दुनिया तक ले जाने का काम करेगी।
जहाँ कल हमने सरिस्का के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, वहीं बीते सप्ताह अलवर के विकास की रफ्तार ने एक और नया आयाम प्राप्त किया।
खैरथल-तिजारा जिले के मुण्डावर को भी एक बड़ी सौगात मिली है। ₹4.76 करोड़ की लागत से यहाँ एक राजकीय महाविद्यालय की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है।
यह महाविद्यालय क्षेत्र के युवाओं, विशेषकर बेटियों, के लिए उच्च शिक्षा के नए द्वार खोलेगा। अब विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूर-दराज़ नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी। शिक्षा के क्षेत्र में यह कदम मुण्डावर और आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति देगा।
इसी के साथ अभिभाषक संघ रामगढ़ की एक वर्षों पुरानी मांग को भी बीते सप्ताह पूरा किया गया। हमने न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ लोगों को स्थानीय स्तर पर समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए एडीजे (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) कोर्ट संचालन की मंजूरी दे दी है। एडीजे न्यायालय के निर्माण हेतु 5 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इसके अतिरिक्त न्यायाधीशों के आवासीय परिसर के निर्माण के लिए 2,516 वर्गमीटर भूमि भी आवंटित की गई है।
भिवाड़ी क्षेत्र के खिलाड़ी युवाओं के लिए भी बीता सप्ताह नई संभावनाओं का संदेश लेकर आया। भिवाड़ी स्टेडियम के फेज़-2 के विकास कार्यों के लिए ₹20 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस चरण के अंतर्गत इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्विमिंग पूल, इंडोर शूटिंग रेंज, एलईडी फ्लड मास्ट लाइट तथा चिलर प्लांट जैसी आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इन सुविधाओं से अलवर लोकसभा क्षेत्र के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिए बेहतर आधारभूत संरचना उपलब्ध होगी। यह परियोजना न केवल स्थानीय खेल प्रतिभाओं को नई उड़ान देगी, बल्कि भिवाड़ी को एक उभरते हुए खेल केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुझे खेल और शिक्षा के क्षेत्र में किया गया हर प्रयास विशेष संतोष देता है। इन प्रयासों के लाभार्थी बच्चों से मिलकर तो मेरा संतोष और भी बढ़ जाता है।
कल अपने लोकसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान मुझे ई-गुरुकुल योजना के अंतर्गत लक्ष्मणगढ़ की पुरानी सब्जी मंडी में संचालित ई-लाइब्रेरी का अवलोकन करने और वहां अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद करने का अवसर मिला। बच्चों का उत्साह, उनकी जिज्ञासा और सीखने की ललक देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई।
लेकिन जब इन बच्चों ने मुझे यह कहते हुए धन्यवाद-पत्र भेंट किया कि इस ई-लाइब्रेरी ने उन्हें अपने सपनों को संवारने और बेहतर भविष्य गढ़ने का अवसर दिया है, तो मैं भावुक हो उठा।
अलवर में बन रही प्रत्येक ई-लाइब्रेरी, प्रत्येक खेल स्टेडियम और उनमें विकसित की जा रही हर सुविधा कोई उपकार नहीं, बल्कि मेरे नन्हे और युवा साथियों का अधिकार है। उनके सपनों को अवसर देने और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने को मैं अपनी जिम्मेदारी मानता हूँ।
सरिस्का के जंगलों से लेकर स्कूलों और ई-लाइब्रेरियों तक, खेल के मैदानों से लेकर न्यायिक आधारभूत संरचना तक अलवर के विकास का हमारा संकल्प स्पष्ट है। प्रकृति का संरक्षण और नई पीढ़ी का सशक्तिकरण, यही विकसित अलवर की मजबूत नींव है।
आपका अपना
भूपेंद्र यादव