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अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा चौक पर सिर्फ पत्थरों की इमारत नहीं है, यह सवा दो सौ साल से भी ज्यादा की विरासत और रिवायत की कहानी है। यह अलवर की कहानी है। यह अलवर के इतिहास की निशानी है। बीती 7 जनवरी को मानो इस ऐतिहासिक स्थल को अपनी स्वर्णिम कहानी कहने के लिए फिर शब्द मिल गए।
चौक के विशाल कपाट से भीतर कदम रखते लगा मानो इतिहास फुसफुसाकर कह रहा हो "स्वागत है, यात्री... तुम समय में पीछे आ गए हो। पर अब हम साथ मिलकर आगे चलेंगे। और सिर्फ चलेंगे नहीं, दौड़ेंगे।"
हमने अभिनेता रणदीप हुड्डा के साथ अलवर टाइगर मैराथन 2026 का उद्घोष इस ऐतिहासिक स्थल से किया। सर्दी की धूप में खुद को सेकने के बाद, शाम को रोशनी में खुद को सजाकर इस चौक ने मानो इस उत्सव का खुद ही अभिवादन किया हो।
अंतरराष्ट्रीय अलवर टाइगर मैराथन 2026 का उद्घोष इस चौक से करने का मेरा उद्देश्य टाइगर, टूरिज्म और स्वास्थ्य को एक माला में पिरोना था। आज आपको यह पाती लिखते हुए मैं अत्यंत प्रसत्र हूँ कि हमें इस कार्य में सफलता मिली। कार्यक्रम के बाद आप में से कई लोगों ने मुझे कहा कि हमने तो सोचा ही नहीं था यह चौक ऐसा जीवंत भी दिख सकता है। यह अलवर की असीम संभावनाओं की बस एक झलक मात्र थी। हमें साथ आकर पूरे अलवर को इसी प्रकार जीवंत करना है। 7 जनवरी ने बताया यह सेभव है।
अलबर टाइगर मैराथन के पंजीकरण 25 जनवरी तक खुले हैं।
आप https://www.alwartigermarathon.com/ पर जाकर या 9667684422 पर मिस्ड कॉल देकर इस मैराथन में भाग ले सकते हैं। यह आपकी अपनी मैराथन है, इसलिए आप दूसरों को भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि यह देश में टाइगर के संरक्षण के लिए संभवतः एक अकेली दौड़ है। पूरे एनसीआर क्षेत्र में वाघ सिर्फ अलवर में हैं, और यह अलवर के लिए गौरव की बात है कि बाधों के संरक्षण के लिए पूरे देश में पहली बार जो मैराथन हो रही है, वह हमारे अलवर में 8 फरवरी को हो रही है।
7 जनवरी को खेलों की दिशा में अलवर एक और महत्वपूर्ण कदम का साक्षी बना। इस दिन सिनर्जी स्टील और गौरी देवी गर्ल्स कॉलेज, अलवर, के बीच एक बैडमिंटन कोर्ट को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। यह बैडमिंटन कोर्ट हमारी खिलाड़ी बच्चियों को आगे बढ़ने के अपार मौके देगा। यह प्रयास मेरे अलवर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और लड़कियों को खेलों के क्षेत्र में विशेष अवसर देने के संकल्प की कड़ी में एक और कदम है।
बीते सप्ताह कुछ और बड़ी सौगातें भी अलवर को मिलीं। इसमें 145 करोड़ से अधिक की सड़क परियोजनाएं भी शामिल हैं।
इसमें हलेना से बड़ौदामेव मार्ग का सुदृढ़ीकरण एवं चौड़ीकरण (Rs 40 करोड़); हल्दीना निठारी-जमालपुर-खेड़ला-रामपुरा-खेरली-पिछनोट-खरेड़ा बीजवार-मोहब्बतपुर-कल्याणपुरा-आलापुर मार्ग से एनएच-248.A तक चौड़ीकरण एवं सुद्दीकरण कार्य (Rs 40 करोड़); तेहल से टपूकरा (खैरथल बघेरी कलां-मचरोली-दौलतपुर-बिबिरानी-जोड़िया-विनोलिया-अमीरका गौटौली-मिलकपुर-तुर्क मार्ग) तक चौड़ीकरण एवं सुदृढीकरण कार्य (Rs 35.56 करोड़): एमडीआर-198 विजय मंदिर-घाटला पाडिसल खैरथल हरसोली-अजरका मार्ग का सुदृढ़ीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य (Rs 30 करोड़) शामिल हैं।
एक सड़क का बनना, एक बैडमिंटन कोर्ट का खड़ा होना, एक ऐतिहासिक स्थल का जीवंत होना, यह सब अलवर के विकास सागर में एक-एक बूंद के समान जुड़ रहे हैं।
मैं आज की पाती समाप्त करने से पहले 7 जनवरी के कार्यक्रम को अपनी उपस्थिति से सफल बनाने वाले सभी गणमान्य लोगों का हृदयतल से धन्यवाद देता हूँ। उद्यमी, अलवर में भाजपा का नेतृत्व, मीडिया के बंधु और अलवर के सभी नागरिक, आपने मुझे फिर ताकत दी है।
आपका अपना
भूपेंद्र यादव