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मुझे खुशी है नववर्ष की शुरुआत मैने अलवर में की। तीन दिन आप सभी के बीच अलवर शहर, बहरोड़ और भिवाड़ी में बिताने के बाद यह पाती आपको लिख रहा है।
शुक्रवार से रविवार तक मुझे अलवर संसदीय क्षेत्र के नमो वन तथा भूरासिद्ध मंदिर वनक्षेत्र में सुबह की सैर, दिन के सामाजिक आयोजनों तथा जनसुनवाई के माध्यम से आप सभी से सीधा संवाद करने का अवसर मिला। आपकी आशाएं, आकांक्षाएं और तकलीफों को सुनने का और उन तकलीफों से उबरने के उपाय साथ मिलकर ढूंढने का अनुभव अनूठा रहा। आपने मेरे माध्यम से हुए विकास कार्यों को सराहा और 'और क्या होना चाहिए' पर अपने सुझाव मेरे सामने रखे। मैं इसके लिए आपका आभारी हूँ।
बीते सप्ताह अलवर लोकसभा क्षेत्र को एक बहुत बड़ी सौगात मिली। यह सौगात ₹862.22 करोड़ रुपए के एक प्रोजेक्ट की है। राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-921 के महवा-मंडावर राजगढ़ सेक्शन को पेव्ड शोल्डर के साथ 4-लेन बनाने की योजना को स्वीकृति मिल गई है।
इस प्रोजेक्ट से अलवर लोकसभा क्षेत्र के लोगों के लिए यात्रा सुगम बनेगी, जिससे विकास को गति मिलेगी।
यह परियोजना प्रस्तावित महवा बाईपास के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के जेबशन से शुरू होती है और कोठी नारायणपुर के पास राज्य राजमार्ग-25 पर खत्म होती है। इस सड़क में बाइपास, फ्लाईओवर और री-अलाइनमेंट शामिल हैं, जिससे हमारे लोकसभा क्षेत्र में यातायात, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक की सुविधा सुगम बनेगी। इस योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-921 के जंक्शन के पास NH-21 पर एक फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इसके साथ ही कुल 11.25 किलोमीटर लंबाई के तीन बाइपास भी प्रस्तावित हैं, जिनमें महवा बाइपास 4.8 किमी, मंडावर बाइपास 3.99 किमी और गढ़ी सवाईराम बाइपास 2.45 किमी शामिल हैं।
मैंने पहले भी कहा है सड़क सिर्फ यातायात को सुगम नहीं बनाती, सड़कें जीवन में सकारात्मक बदलाव को गति देती हैं। सड़कें देश के विकास की पथप्रदर्शक होती हैं।
इसलिए इस परियोजना की स्वीकृति की आप सभी को हार्दिक बधाई।
मैं आज आप सभी के साथ एक विशेष खबर साझा करने की आतुर हूँ। बुधवार, यानी 7 जनवरी, को अलवर में खेल और स्वास्थ्य प्रेमियों के लिए तो एक बड़ा दिन है ही, लेकिन टाइगर प्रेमियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बुधवार को हंम सभी के बीच अलवर टाइगर मैराथन के 'ब्रांड एम्बेसडर' रणदीप हुड्डा सम्मिलित होंगे। हम सिटी पैलेस से अलवर टाइगर मैराथन 2026 का उद्घोष करेंगे। यह मैराथन सेहत के लिए तो है ही, बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता के विस्तार के लिए भी है। यह गर्व का विषय है कि पूरे एनसीआर में बाघ सिर्फ अलवर में पाए जाते हैं। और अलवर संभवतः एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ किसी मैराथन आयोजन के केंद्र में बाघ संरक्षण है।
8 फरवरी को हजारों लोग एक साथ दौड़ेंगे ताकि अलवर और अलवर टाइगर को विश्व में पहचान मिले। आप भी इस दौड़ में भाग लें और पंजीकरण कराएं।
आपका अपना
भूपेंद्र यादव