‘एक पाती अलवर के नाम’ | 22.12.2025

22/12/2025

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मैं इस पाती को अलवर संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम मानता हूँ। पर आज यह पाती मैं अरावली पर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए लिख रहा हूँ। अलवर भी अरावली पर्वतमाला का एक अभिन्न अंग है जहाँ सरिस्का टाइगर रिज़र्व और सिलीसेढ़ झील जैसी प्राकृतिक धरोहर विद्यमान है।

मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि अरावली पूर्ण रूप से सुरक्षित है और माननीय सर्वोच्च न्यायालय का फ़ैसला अरावली के समेकित संरक्षण, अवैध खनन पर अंकुश लगाने, पर्यावरणीय मानकों के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्रों के बाहर अनुमन्य खनन के माध्यम से स्थानीय लोगों को लाभ देने और क्षेत्र कें आर्थिक विकास के साथ साथ प्राकृतिक संरक्षण के दृष्टिगत किया गया है।

मेरा ये दृढ़ मत है कि अधिकांश लोगों ने माननीय न्यायालय के निर्णय का गहन अध्ययन नहीं किया है जिसका फ़ायदा उठा कर कुछ लोग सच्चाई के विपरीत अरावली की परिभाषा और उसके भविष्य को लेकर मनगढ़ंत भ्रम फैलाने का कार्य कर रहे हैं।

वास्तविकता यह है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई अरावली की परिभाषा, जिसमे स्थानीय ऊंचाई से 100 मीटर ऊपर उठने वाले भू-आकृतियों या पहाड़ी को अरावली माना जाएगा, राजस्थान में पहले से लागू परिभाषा, जो की श्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में 2002 में गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बनाई गई, के समरूप है, जिसके आधार पर आज भी राजस्थान में ऐसी अरावली की पहाड़ियाँ जिसकी ऊँचाई 100 मीटर से ज़्यादा है पर खनन प्रतिबंधित है। अतः यह भ्रम फैलाना कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मानी गई अरावली की परिभाषा एक नई परिभाषा है जिससे अरावली का नुक़सान होगा पूर्णतया तथ्यहीन है।

यह भी जानना ज़रूरी है कि, ऐसी पहाड़ियाँ जो 100 मीटर से ऊपर हैं, न सिर्फ़ शिखर से भूतल तक अरावली पर्वत मानी जाएंगी, बल्कि उनके आधार क्षेत्र आने वाली सभी भू आकृति भी अरावली पर्वत में सम्मिलित होंगी। साथ ही ऐसी दो 100 मीटर से ऊँची पहाड़ियाँ, यदि आपस में 500 मीटर तक की दूरी पर स्थित हैं, तो उन पहाड़ियों के बीच की सारी भूमि, जिसमे छोटी पहाड़ियाँ तथा अन्य भू आकृतियाँ भी शामिल होंगी, अरावली रेंज की परिभाषा में आयेंगी और सुरक्षित रहेंगी।

अतः ये भ्रम फैलाना कि अरावली की नई परिभाषा से 90 फ़ीसदी पर्वत श्रेणिया नष्ट हो जायेंगी निराधार है। वास्तव में इस परिभाषा से 90 फ़ीसदी से भी ज्यादा अरावली का क्षेत्र सुरक्षित रहेगा, और जहाँ तक खनन का प्रश्न है, माननीय न्यायालय के निर्णय के अनुसार किसी अवैध खनन को रेगुलराइज़ नहीं किया जाना है, किसी भी प्रकार का खनन संरक्षित क्षेत्रों, वेटलैंड्स, क्षतिपूरक वृक्षारोपण, नेशनल पार्क और सैंचुअरीज के ईएसज़ेड क्षेत्रों में नहीं हो सकता और वैध खनन का निर्धारण भी आइसीएफ़आरई द्वारा मैनेजमेंट प्लान फॉर सस्टेनेबल माइनिंग के निरूपण के बाद निर्दिष्ट क्षेत्रों में ही संभव हो सकेगा, जिससे एक अनुमान के अनुसार एक प्रतिशत से भी कम (0.19%) अरावली भूमि पर ही खनन संभव हो सकेगा।

हमारा अलवर अरावली पर्वतमाला का एक अभिन्न अंग है जहाँ सरिस्का टाइगर रिज़र्व और सिलीसेढ़ झील जैसी प्राकृतिक धरोहर विद्यमान है और इसके सरक्षण और विकास से हम कोई समझौता नहीं कर सकते।

मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ की मैं अरावली की गोद में पैदा हुआ हूँ, इसी पर्वतश्रृंखला के सानिध्य में पला-बढ़ा हूँ, अरावली के संरक्षण और संवर्धन के लिए मैं सदा संकल्पित रहा हूँ और सदैव कटिबद्ध रहूँगा।

 

आपका अपना

 

भूपेंद्र यादव